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निर्जला एकादशी पर ऐसे करे भगवान विष्णु की पूजा।

निर्जला एकादशी पर ऐसे करे भगवान विष्णु की पूजा।



ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी का और सभी एकादशियों से अधिक महत्व होता है। निर्जला एकादशी वाले पूरे दिन व्रत करने वाले न केवल अन्न बल्कि जल का भी पूर्ण रूप से त्याग करते है। यही कारण है की निर्जला एकादशी का अन्य सभी एकादशी में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 


साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं, किंतु हमारे शास्त्रों में  अनुसार जो भी व्यक्ति निर्जला एकादशी की पूरी विधि-विधान से व्रत करता है, उसे सभी एकादशियों के बराबर ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसलिए भी निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस साल निर्जला एकादशी 23 जून को पड़ रही है। 

व्रत करने का विधान


एकादशी की सभी तिथियां भगवान विष्णु को ही समर्पित होती है लेकिन निर्जला एकादशी में विष्णु भगवान के शालिग्राम रूप की पूजा की जाती है। ज्येष्ठ माह में भीषण गर्मी के कारण निर्जला व्रत करना बहुत ही मुश्किल होता है इस पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किये बिना व्रत रखा जाता है और अगले दिन द्वादशी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है।

शास्त्रों ‘शालिग्राम’ को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है, सुबह जल्दी उठ के स्नान आदि करने के बाद पूजा के स्थान में पर शालिग्राम स्थापित करें। अब चंदन, रोली का टीका लगाते हुए तुलसी और मिश्री का प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद भगवान विष्णु के नमो का पाठ करने के बाद “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

दान का भी है महत्व


कोई भी व्रत बिना दान दिए अधूरा ही मन जाता है। निर्जला एकादशी व्रत को पूर्ण रूप से सफल करने के लिए कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना आवश्यक करना चाहिए।  वस्तुएं जैसे घड़ा, चीनी, सफेद कपड़ों और छाता आदि दान करने का अधिक महत्व होता है।

क्या न करे।


व्रत का अर्थ होता सात्विक, अर्थात किसी भी व्रत को पूरा करने के लिए उससे पूर्ण होने के लिए आपके मन मे पूर्ण मन सात्विकता और धर्म पालन करना अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है इसलिए अगर आप व्रत रख रहे हैं तो इस दिन आपको  क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, जलन, आदि जैसी भावनाओं से सुर रहना चाहिए।

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