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नवरात्रों में भूलकर भी न करे यह गलतियां

नवरात्रों में भूलकर भी न करे यह गलतियां.


नवरात्रि को देवी दुर्गा की उपासना का समय सबसे पवित्र माना जाता है। पुराणों के अनुसार चैत्र और आश्विन मास में आने वाली नवरात्र में  व्रत, हवन और कन्या पूजन सेे हमारे सर्वसिद्ध के सारे रास्ते खुल जाते है। नवरात्रि के दिनों में शुद्धता और पवित्रता का ख्याल रखना अति आवश्यक होता है। आइये जानते हैं कि नवरात्र के पावन दिनों में किन किन बातों का आपको विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।



 लहसून और प्याज का सेवन नही कारण चाहिए।

नवरात्र के दिनों में हमे अपने घर के अन्दर लहसुन और प्याज प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। लहसून, प्याज, मांसाहार आदि ये अब तामसी प्रवति के भोजन होते है तथा ये मनुष्य की तामसी प्रवृत्ति को जागृत्त करते हैं इसलिए इन सभी प्रकार के भोजन से दूर रहना चाहिए। इसिलए अगर आप बाहर ही जाए तो घर का बना भोजन ही खाना चाहिए। क्योंकि बाहर के खाने में लहसुन, प्याज आदि का प्रयोग हो सकता है। 


शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखें।

नवरात्र के दिनों में हमे  शेविंग या बाल नही काटने चाहिए। इन दिनों नाखून काटने से भी बचना चाहिए। परंतु  आप इन दिनों में अपने बच्चों का मुंडन कर सकते है मुंडन के लिए ये दिन शुभ माने जाते है।
नवरात्र के दिनो मे पूजा स्थल के को साफ करने गंगा जल से शुद्ध करना चाहिए। रोज माता रानी को भोग लगाने के बाद ही भोजन करना चाहिए।


ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

हिन्दू पुराणों के अनुसार नवरात्र में  किसी भी तरह का संबंध नहीं बनाना चाहिए ऐसा करने से व्रत खंडित हो जाता है। नवरात्र के दौरान पति-पत्नी को साथ सोने से भी बचना चाहिए। इन दिनों अपने मन मे किसी भी तरह काम को मन मे नही लाना चाहिए। इन दिनी में विवाह का आयोजन भी नाइ करना चाहिए। इन दिनों किसी भी तरह काम और प्रेम प्रसंग से दूर होके केवल माता रानी का भी ध्यान रखना चाहिए।


नमक का प्रयोग से बचे।

जो भक्त लोग नवरात्र के सारे व्रत करते है उसने साधारण नामक प्रयोग में नही लाना चाहिए। उन्हें खाने में सेंधा नमक, कुट्टू का आटा, साबूदाना, समाँ के चावल, सिंघाड़े का आटा, फल, आलू आदि का सेवन करना चाहिए। किसी भी तरह का आचार या खटाई भी इन दिनों खाना चाहिए।


अगर मासिक धर्म हो तो।

वेदों के अनुसार नवरात्र में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा नवरात्र के दिनों में एक ही बार पूरा फल खा लेना चाहिए। अगर आप चालीसा या सप्तशती का पाठ कर रहे हैं तो उसे बीच में नही  रोकना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से नाकारात्मक शक्तियां आती हैं। तथा इस दौरान हो सके तो चमड़े की किसी भी समान का उपयोग न करे।

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