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स्त्रियों के लिए गायत्री मंत्र का जाप वर्जित क्यों?


 स्त्रियों के लिए गायत्री मंत्र का जाप वर्जित क्यों?



हमारी भारतीय संस्कृति में मनुष्य अपने से ज्यादा रीति-रिवाज़ों को तवज्जो देता है। हम भारतीय अपने  से ज्यादा संस्कार और उनसे जुड़े रिवाज़ को  बहुत ज्यादा मूल्यवान समझे जाते हैं। यही कारण है कि भारत में आज भी सदियों पुराने रीति-रिवाजों को बहुत ज्यादा मूल्यवान समझे हैं फिर यह रिवाज धार्मिक संदर्भ के हों या फिर लोक प्रचलित, इनका पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य माना जाता है। भारतीयों के लिए यह संस्कार उनके जीवन के मार्गदर्शक हैं, जिनका पालन करना हर रूप में आवश्यक है।

संस्कारों की बात करे तो हिन्दू धर्म में अनेको पुराण तथा वेदो में अनेको निर्देश हमारे ऋषि मुनिओ द्वारा दिए गए है | और हर एक कार्य के लिए ऋषि मुनिओ ने वेदो और पुराणो में अनेको बातो का उल्लेख किया गया है | और इनका उल्लंघन करना हिन्दू धर्म में  वर्जित बताया गया है | 

कैसे पूजा करनी चाहिए, पूजा में किन किन सामग्री का उपयोग करे, मंत्रो का सही उच्चारण कैसे करे, पूजा में कैसे बैठे, इत्यादि ऐसे अनेक बिंदु हैं जिनका हमारे हिन्दू धर्म में अनेको प्रकार से वर्णन किया गया है,जिनके बिना पूजा का सही फल नहीं मिलता है| हिन्दू धर्म में बिना मंत्रो के सही उच्चारण में पूजा को सफल नहीं माना जाता, तथा हर पूजा के कुछ महत्पूर्ण मंत्र होते है जिनका पूजा में सही से उच्चारण करना अति महत्पूर्ण होता है| जिसके बिना पूजा सफल नहीं होती|

चाहे आप उस  मंत्र का  हज़ारों बार ही जाप क्यों न करे। गलत उच्चारण करते हुए उस मंत्र का फल आपको कभी नहीं मिलता हैं, इसीलिए हिन्दू धर्म में प्रत्येक मंत्र को सही ढंग से पढ़ने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। हिन्दू धर्म में सभी मंत्रों में एक मंत्र को अति महत्पूर्ण मंत्र और पवित्र मंत्र माना गया है। इस मंत्र का स्थान अन्य सभी मंत्रो में उच्च है, तथा हमारे हिन्दू धर्म में ऐसी मानयता है की इसका उच्चारण केवल पुरुषो द्वारा ही किया जा सकता है|

और यह मंत्र है ‘गायत्री मंत्र’,जिसे ब्रह्मऋषि विश्वामित्र ने ऋग्वेद में इससे उल्लेखित किया था। गायत्री मंत्र को सभी मंत्रो में उत्तम मंत्र मन जाता है|  इस मंत्र का जाप उन लोगों द्वारा किया जाता है जिन्होंने जनेऊ धारण किया हो। इस मंत्र द्वारा वे देवी  देवताओ का पूजा में आह्वान करते हैं। यह मंत्र सूर्य भगवान की प्राथना स्वरूप भी माना जाता है, गायत्री मंत्र - ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। जिसका अर्थ है, हे भगवान, प्रकाशमान परमात्मा हम आपके तेज़ का ध्यान करते हैं, हमे धर्म का सही ज्ञान प्रदान करे तथा हमारी बुद्धि को सत् प्रदान करे| 

क्योकि गायत्री मंत्र सूर्य भगवान को प्राथना स्वरूप संबंधित होने के कारण ऐसा माना जाता है कि गायत्री मंत्र सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पढ़ने से अतियाधिक लाभ प्राप्त होता है, गायत्री मंत्र को जेनऊ पहनते समय भी पढ़ा जाता है। गायत्री मंत्र से संबंधित कुछ ऐसे बात भी हैं जो काफी कम लोगो को मालूम है| जैसे की स्त्रियों का ‘गायत्री मंत्र’ को पढ़ना हमारे वेदो के अनुसार वर्जित है.

वेद पुराणों के अनुसार नारिओ को गायत्री मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। इसके पीछे धर्म के साथ अन्य ऐसे और भी कई कारण है, जिन्हें स्त्रीओ के स्वास्थ दुनिया से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्तया है कि पहले स्त्रिया भी जनेऊ पहना करती थी। पुरुषों की तरह वह भी हर तरह के धार्मिक कर्म-कांडों में हिस्सा लिया करती थी। लेकिन कुछ समय के बाद सारी दशा ही बदल गई। जिसका सबसे बड़ा कारण था स्त्रियों को होने वाला ‘मासिक धर्म’। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है जिस किसी भी  स्त्री मासिक धर्म हो वह किसी भी प्रकार की पूजा एवं धार्मिक कार्यों में हिस्सा नहीं ले सकती थी  जब तक उनका मासिक धर्म ठीक नहीं हो जाती। तथा प्राचीन काल मे स्त्रियां गर्भधारण के समय भी धार्मिक कार्यो से दुरी बनाये रहती थीं। धीरे-धीरे स्त्रियों  हर  धर्म-कर्म से दूर होती गई, परिणामस्वरूप आज कल भी स्त्रियां कई प्रकार के धार्मिक कार्यों से दूर रहती है|

 वेदो के अनुसार गायत्री मंत्र का जाप करते समय  मनुष्य के शरीर में तीन चक्रों पर प्रभाव डालते हैं। ये हैं मूलाधार, स्वाधिष्ठान और मणिपुर। इन चक्रों पर गायत्री मंत्र का प्रभाव होता है। शिशु के जन्म  से लेकर विकास होता है वैसे-वैसे शिशु का विकास होता है, उसी प्रकार से लड़के और लड़की के हार्मोन्स में भी बदलाव होता है इसीलिए दोनों का शारीरिक बनावट अलग होती है। यदि स्त्री रोज  गायत्री मंत्र का जाप करेगी तो वह पुरुष की तरह व्यवहार करने लगती है। और  इसका असर उसके शारीरिक बनावट में भी आता है  अनचाहे बाल आना, पुरुषों में दाढ़ी आना और उनके मासिक धर्म में भी दिक्कतें आना, स्त्री अगर गर्भवती है या बच्चे को जन्म दे चुकी है तो उनके दूध आने में दिक्क्त का सामना करना पड़ता है.यदि वह अधिक मात्रा में गायत्री मंत्र का जाप करे तो वह शारीरिक रूप से भी पुरुषो के सामान व्यहार करने लगती है. उनकी आवाज तथा मांसपेशिया पुरुषो के सामान होने लगती है इसीलिए हिन्दू धर्म में  स्त्रियो का गायत्री मंत्र का जाप करना वर्जित मन गया है.  

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